जिस तट पर पानी पीने से, अपमान प्यास का होता हो,
उस तट पर पानी पीने से, प्यासे मर जाना बेहतर है।
कांटे तो अपनी आदत के अनुसार नुकीले होते हैं,
कुछ फूल जगत में ऐसे हैं, उनसे जहरीले होते हैं,
माली यदि आंखें बंद किये, मधु के बदले विष से सींचे,
ऐसे उपवन में खिलने से, पहले झर जाना बेहतर है।
जिस तट पानी पीने से.............................
नौका को डुबो देने की जिद पर, यदि तूफां ही डट जाए,
हर एक लहर नागिन बनकर, डसने के लिए फन फैलाए,
तो ऐसे में भीख किनारों की, धारों से मांगना ठीक नहीं,
पागल तूफानों से लड़कर, मझधार समाना बेहतर है।
उस तट पर पानी पीने से...........................
जो दिया उजाला दे ना सके, तम के चरणों का दास रहे,
अंधियारी रातों में सोये, दिन में दिनकर के पास रहे,
जो पल-पल धुंआ उगलता हो, जीवन में कालिख मलता हो,
ऐसे दीपक के जलने से, पहले बुझ जाना बेहतर।
जिस तट पर पानी पीने से.........................
