Tuesday, February 22, 2011

प्रथम प्रेम पर्व

माई first वैलेंटाइंस डे
यूं तो वो बहुत खुशमिजाज थी,
लेकिन उस दिन वो मुझसे वहुत नाराज थी

वजह-
दिन था वैलेंटाइन का,
लगने वाला मुझपे फाइन था
क्योंकि-
मैंने उसको विश नहीं किया था
व्यस्तताओं के बीच कुछ ऐसा फंसा
मेरे पास उसके लिए समय ही न बचा
फिर रात दो बजे जब हुई घर वापसी
मैंने सूरत बनाई मुरझाई सी
बहाना जब कोई समझ ही आया
तो मैंने उसको बातों में उलझाया
लेकिन-
बात कहां बनने वाली थी
मुझसे ज्यादा तो वो गुस्से वाली थी
खैर, किसी तरह उसको मैंने छत पर बुलाया
और बोला, तुम्हारे लिए हंू एक गिफ्ट लाया
उसने पूछा तो मैं बोला,
'ये चांदनी रात और महकती हवाओं का साज
फूलों पर बिखरी ओस संग भोर का आगाज
दिस इज योर गिफ्ट वन
मेरी इतनी सी बात उसको बहुत भायी
गुस्सा गायब और चेहरे पर मुस्कुराहट आई
और फिर क्या,
बची रात हम दोनों ने साथ में बिताई
अगर कुछ खास था तो यह कि
मैं था बालकनी पर और वो बहाने से
अपनी छत पर थी आई.

14 फरवरी 2011

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