शाम ढल चुकी है
चलो महफिल सजा लें
बेताब है शराब
बोतल से बाहर आने को
चलो महफिल सजा लें।
बैठ पुराने दोस्तों संग
बचपन की शरारतें याद कर
आओ हम खिलखिला लें
चलों महफिल सजा लें।
बीते दिनों को याद कर
भर आता है दिल मेरा
उसकी यादें दफनाने को
चलो महफिल सजा लें।
कोरोना के इस काल में
दहशत भरे माहौल में
किसी अजीज के जाने से पहले
चलो महफिल सजा लें।
चलो महफिल सजा लें
बेताब है शराब
बोतल से बाहर आने को
चलो महफिल सजा लें।
बैठ पुराने दोस्तों संग
बचपन की शरारतें याद कर
आओ हम खिलखिला लें
चलों महफिल सजा लें।
बीते दिनों को याद कर
भर आता है दिल मेरा
उसकी यादें दफनाने को
चलो महफिल सजा लें।
कोरोना के इस काल में
दहशत भरे माहौल में
किसी अजीज के जाने से पहले
चलो महफिल सजा लें।
राज 22.08.20
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