Monday, August 24, 2020

चलो महफिल सजा लें

 शाम ढल चुकी है
चलो महफिल सजा लें
बेताब है शराब
बोतल से बाहर आने को
चलो महफिल सजा लें।

बैठ पुराने दोस्तों संग
बचपन की शरारतें याद कर
आओ हम खिलखिला लें
चलों महफिल सजा लें।

बीते दिनों को याद कर
भर आता है दिल मेरा
उसकी यादें दफनाने को
चलो महफिल सजा लें।

कोरोना के इस काल में
दहशत भरे माहौल में
किसी अजीज के जाने से पहले
चलो महफिल सजा लें।

राज 22.08.20

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