मेरे और तुम्हारे होंठ.....
कुछ मीठे कुछ खारे होंठ,
रस से भरे तुम्हारे होंठ,
सोलह मधु मौसम बीते,
फिर भी अभी कंवारे होंठ,
हल्का सा भी हिले अगर,
लगता मुझे पुकारें होंठ,
काले मेघों में भी लगते,
सतरंगी से प्यारे होंठ,
न जाने कब मिल पाएंगे,
मेरे और तुम्हारे होंठ...
कुछ मीठे कुछ खारे होंठ,
रस से भरे तुम्हारे होंठ,
सोलह मधु मौसम बीते,
फिर भी अभी कंवारे होंठ,
हल्का सा भी हिले अगर,
लगता मुझे पुकारें होंठ,
काले मेघों में भी लगते,
सतरंगी से प्यारे होंठ,
न जाने कब मिल पाएंगे,
मेरे और तुम्हारे होंठ...
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