अखबार की दुनिया में दो प्रकार के लोग पाए जाते हैं, एक तो पत्तेचाट और दूसरे गैरपत्तेचाट। गैरपत्तेचात हैं तो कोई बात नहीं। पत्तेचाट हैं तो उसमें दो बातें हो सकती हैं। या तो वो संपादक बन जायेगा या फिर जिस पोस्ट पे था वहीं बना रहेगा। संपादक बना तो कोई बात नहीं। नहीं बना तो फिर दो बातें। या तो वो नौकरी छोड़ देगा या करता रहेगा। छोड़ दी तो बहुतों का भला। नहीं छोड़ी तो उसमें भी दो बातें। या तो वो दूसरों का काम लगायेगा या नए संपादक की pattechaati में आ जायेगा। pattechaati की तो रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन पा जायेगा और दूसरों का काम लगाया तो अपने ही समाज से कट जायेगा।
फाइनली साला मर के चला जायेगा और कोई दरवाजे पर भी नहीं जायेगा। बस लोग यही कहेंगे अच्छा huwa साले से पिंड छूटा।
Moral***** जिंदगी में ऐसा काम करो कि किसी का दिल न दुखे। बाकी सब ठीक है, बस नशा थोड़ा अच्छा है।
फाइनली साला मर के चला जायेगा और कोई दरवाजे पर भी नहीं जायेगा। बस लोग यही कहेंगे अच्छा huwa साले से पिंड छूटा।
Moral***** जिंदगी में ऐसा काम करो कि किसी का दिल न दुखे। बाकी सब ठीक है, बस नशा थोड़ा अच्छा है।
No comments:
Post a Comment