सुकून है कि मां बाप की सरपरस्ती में रहे।।
स्वजन और वतन छोड़ पैसे कमाए बहुत।
मगर मन हमारा घर की ड्योढी में रखा रहा।।
चकाचौंध दुनिया की कभी रास न आई हमको।
हृदय पर कब्जा रहा, हमेशा चांदनी रातों का।।
कभी चलकर तो देखो, खेतों की पगडंडियों पर।
मां की गोद का एहसास, न मिले तो तुम बताना।
राज 14 सितंबर 2023
हिंदी दिवस की शुभकामनाएं
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