थोड़ा असमंजस में था, पर ऐसा न चाहा था मैंने
हत्यारा मत कहो मुझे, कोई जुर्म नहीं कर डाला मैंने
कुछ चीजें होती हैं नहीं, इंसानों के बस में दोस्त
बिना बताए चुपके से, उसको अपना डाला था मैंने।
धीरज रखो जीवन में, खोना पाना तो चलता है
कम कलियों और फूलों से भी उपवन सजता है
अभी बकाया उम्र बहुत, और मुकाम तलाशेंगे
सुख-दुख के ताने-बाने से जीवन और निखरता है।
राज
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