Thursday, September 14, 2023

सरपरस्ती

मलाल नहीं कि जिंदगी तंगहाली में चली।
सुकून है कि मां बाप की सरपरस्ती में रहे।।
स्वजन और वतन छोड़ पैसे कमाए बहुत।
मगर मन हमारा घर की ड्योढी में रखा रहा।।
चकाचौंध दुनिया की कभी रास न आई हमको।
हृदय पर कब्जा रहा, हमेशा चांदनी रातों का।।
कभी चलकर तो देखो, खेतों की पगडंडियों पर।
मां की गोद का एहसास, न मिले तो तुम बताना।
राज 14 सितंबर 2023
हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

Thursday, April 28, 2022

i m not a murderer..

थोड़ा असमंजस में था, पर ऐसा न चाहा था मैंने
हत्यारा मत कहो मुझे, कोई जुर्म नहीं कर डाला मैंने
कुछ चीजें होती हैं नहीं, इंसानों के बस में दोस्त
बिना बताए चुपके से, उसको अपना डाला था मैंने।

धीरज रखो जीवन में, खोना पाना तो चलता है
कम कलियों और फूलों से भी उपवन सजता है
अभी बकाया उम्र बहुत,  और मुकाम तलाशेंगे
सुख-दुख के ताने-बाने से जीवन और निखरता है।

राज

Sunday, October 24, 2021

मोहब्बत में दूरियां

कौन है दुनिया में जिसे मय से मोहब्बत नहीं 
कोई बोतल से तो कोई आंखों से पिया करता है 

अब मेरे लिए हो तुम जिंदगी और मौत का सबब 
तन्हाइयों में कोई तुम्हारा इंतजार किया करता है 

उम्र काटना मैं चाहता हूं तेरे दामन से लिपट कर
एक तू है कि जब तक हाथ छुड़ा लिया करता है 

और होता नहीं मयस्सर वो महीनों तक मुझे 
फिर भी मेरे नगमों का तू आकार हुआ करता है

राज

Thursday, July 8, 2021

प्रतिभा के लिए.....


कसीदे नहीं पढूंगा दोस्त, मैं अब तुम्हारी शान में
निकल चुके तुम हाथ से, हो प्रतिभा की कमान में
अजीज थे, करीब थे, तुम मस्तियों में भी शरीक थे
अब धीर-गंभीर बनो, दुनिया देखो अपनी जान में

मैसेज टू योर मैरिड लाइफ----

ये डोर बहुत कमजोर है, रहना न खींचतान में
पत्नी की हर मांग पर, यसबॉस रखना जुबान में
सिल्वर जुबली मनाने के लिए देता हूं तुमको मूलमंत्र
दब के रहना, उफ न करना, न रहना किसी गुमान में
राज
28 जून 21

कोई सहारा नहीं बचा, इस मय के सिवा
तन्हाइयों में इस कदर, नाकारा हो चुके हैं
उम्मीद न रखो यारो, हमसे मोहब्बत की
नहीं रहे दरिया हम, किनारा हो चुके हैं।

जख्म और जिंदगी

अपनों के लिए भी मैं अजनबी हो चुका हूँ।
कहते हैं सभी कि मैं मतलबी हो चुका हूँ।
खता इस खादिम की बस इतनी सी है खुदा।
दो रोटियों के चक्कर में, बेघर हो चुका हूँ।

तेरे फितूर में बेनूर हो चुका हूँ।
रहते-रहते तन्हा बेशऊर हो चुका हूँ।
अदब और शर्म से नहीं रहा नाता कोई
कुछ फिक्रमंदों ने बताया था मुझे---
मयखानों और दीवानों में मशहूर हो चुका हूँ।
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जख्मों के सिवा जिंदगी में, कुछ और नजर आता नहीं
कई तो नासूर बन गए, उनका इलाज समझ आता नहीं
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राज, 02 जुलाई 21

Monday, August 24, 2020

चलो महफिल सजा लें

 शाम ढल चुकी है
चलो महफिल सजा लें
बेताब है शराब
बोतल से बाहर आने को
चलो महफिल सजा लें।

बैठ पुराने दोस्तों संग
बचपन की शरारतें याद कर
आओ हम खिलखिला लें
चलों महफिल सजा लें।

बीते दिनों को याद कर
भर आता है दिल मेरा
उसकी यादें दफनाने को
चलो महफिल सजा लें।

कोरोना के इस काल में
दहशत भरे माहौल में
किसी अजीज के जाने से पहले
चलो महफिल सजा लें।

राज 22.08.20

Sunday, September 2, 2018

जीजा का जलवा

होली की ठिठोली में अगर जीजा भी हों हमजोली तो फिर बात ही क्या है। रंग खेलने का मजा ही दोगुना हो जाता है। लेकिन यहां बात थोड़ी हटकर है। हमारे जीजा हमजोली नहीं थे। हम तो उनके आगे छोटे-छोटे बच्चे थे। लेकिन जीजाजी आ जाएं तो उनका क्रेज हमारे सिर चढ़कर बोलता था। हम सामने तो नहीं जाते थे, लेकिन मेहमानखाने के आसपास खड़े होकर कनखियों से उनको ही निहारा करते थे।
खैर किस्सा तो होली का चल रहा था। फागुन का महीना था और होली आने में कुछ ही दिन बचे थे। मैं कक्षा चार या पांच की छात्रा थी उस समय। मुझे चिट्ठी पढ़नी आती थी। घर में कोई भी खत आता था तो मैं ही अम्मा को पढ़कर सुनाती थी।
जीजाजी होली पर अक्सर आते थे। लेकिन इस बार उनके आने की कोई सूचना नहीं थी। ठीक होली के एक दिन पहले उनका खत आया। उन्होंने खासतौर से अपनी छोटी-छोटी सालियों के लिए लिखा था। खत के साथ में उन्होंने रंग भी भिजवाया था। खत को लेकर मैं इतना खुश थी कि मैंने उसे अपनी सहेलियों के साथ अपनी चचेरी बहनों को भी दिखाया।
जीजा ने खत में सभी का कुशल मंगल पूछने के साथ हम सभी को प्यार भेजा था। होली पर ना आने का खेद जजाते हुए उन्होंने लिखा कि तुम सभी के लिए रंग भिजवाया है। इसे होली पर अपने हाथों से गालों पर लगा लेना। तुमको कसम है।
होली वाले दिन सुबह-सुबह ही मैं जीजा की ओर से भेजे गए रंग के पैकेट को लेकर अपनी चचेरी बहनों के पास पहुंच गई; हम सभी ने रो-रोकर वह रंग अपने गालों पर लगाया। अम्मा ने जब यह सीन देखा तो वह हैरत में पड़ गई। वो हमारे पास आईं और पूछा, ये क्या तमाशा लगा रखा है। तुम सब रो-रोकर यह रंग क्यों अपने गालों पर लगा रही हो। तब मैंने अम्मा को किस्सा बताया।
जीजा का खत आया था। उन्होंने उसके साथ में रंग भेजकर लिखा था कि इसे गालों पर अपने हाथों से लगा लेना। तुमको कसम है। अम्मा फिर तुम्हीं ने तो बताया था कि कोई कसम दे तो उसे मानना चाहिए। कसम तोड़ने से वो आदमी मर जाता है। हम तो इसीलिए रोकर रंग लगा रहे हैं, कहीं जीजा मर ना जाएं। मेरा इतना कहना था कि अम्मा खूब जोर से हंस पड़ीं।